अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: ऑस्ट्रेलिया के सुन्नी मुफ्ती ने इमाम खुमैनी के व्यक्तित्व को ज्ञानात्मक, फ़िक़्ही व ध्रमशास्त्र और इरफान की निगाह से एक महान व्यक्तित्व का मालिक बताते हुए कहा कि मैंने उनकी किताब “असरारुस्सलात” का अध्ययन किया है।
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी सिडनी के मुफ्ती ने ईरान के अराक शहर में '' इमाम खुमैनी और इस्लामी इंक़ेलाब के लीडर के विचारों में इस्लामी सम्प्रदाय के शीर्षक से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा: ईरान में इस्लामी इंक़ेलाब क्यों सफल हुआ? जबकि दुनिया में इससे पहले और बाद बहुत सारे इंक़ेलाब असफल हो गए। इसकी वजह यह है कि इमाम खुमैनी का संपर्क आसमान से था उन्होंने दुनिया को तलाक दे दिया था और कुरान की यह आयत ’’فاسئلو اھل الذکر ان کنتم لا تعلمون‘‘ उन पर लागू होती है।
ताजुद्दीन हिलाली ने आगे कहा कि इमाम खुमैनी ने बिना किसी भेदभाव और राष्ट्रवाद के इस्लाम, मुसलमानों और इस्लामी एकता के लिए संघर्ष किया।
ऑस्ट्रेलिया के मुफ्ती ने इस्लामी सम्प्रदायों के बारे में इमाम खुमैनी (रह) के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा: इस्लामी एकता के मैदान में इमाम खुमैनी का पहला कदम यह था कि उन्होंने सभी मुसलमानों के बीच एकता को जरूरी जानते हुए कहा आज तेहरान कल फिलिस्तीन। इमाम ने सबसे बड़े शैतान अमेरिका और इस्राईल को ईरान से बाहर किया।
अगर हम एक ख़ुदा, एक पैग़म्बर, एक किताब और एक क़िबले के मानने वाले नहीं होते तब भी हमारी एकता के लिए यह काफी था कि हम सब का एक संयुक्त दुश्मन है। हमें इस्लामी जीवन बिताना चाहिए, जाहिलियत की गंदी विचारधारा को पुनर्जीवित नहीं करना चाहिए, हमारे पैगंबर ने इन विचारधाराओं को नष्ट किया है हमारे लिए अच्छा नहीं है कि समकालीन जाहिलियत के विचारों को जीवित करें।
उन्होंने कहा: ख़ुदावन्दे आलम ने ईरानी राष्ट्र के संबंध में अपने इस वादे को पूरा किया है '' यदि तुम शक (गुमराही) का शिकार रहोगे तो अल्लाह एक दूसरी क़ौम को पैदा करेगा '' पैग़म्बरे अकरम ने खुद इस आयत की व्याख्या की और कहा सलमान फारसी की कौम उनकी जगह लेगी। अगर हम फ़िलिस्तीन को छोड़ देंगे तो अल्लाह किसी दूसरी क़ौम को वुजूद में ले आएगा अगर हमने सबसे बड़े शैतान से लड़ना छोड़ दिया तो ख़ुदा किसी दूसरी क़ौम को हमारी जगह लाएगा।
अहलेसुन्नत धर्मगुरू ने इस बात पर जोर दिया: हम वह उम्मत हैं जो बीमार जरूर होंगे लेकिन नष्ट नहीं होंगे। हाँ इराक, सीरिया, मिस्र, लीबिया, फ़िलीस्तीन और अन्य इस्लामी देशों में बहुत खून बह गया है यह वह खून है जिससे एक और क़ौम वुजूद में आएगी।
उन्होंने अंत में कहा: अल्लाह का वादा पूरा होगा। कुरान ने आमंत्रित किया है कि हम एकजुट हो जाएं। अल्लाह ने हमें आपस में हमदिली और सहानुभूति के साथ रहने के लिए आमंत्रित किया है। मतभेद ज़रूरी लेकिन यह मतभेद दृष्टिकोण की हद तक रहना चाहिए, हमें कुरान की वास्तविकता को समझने की कोशिश करना चाहिए हमें एक दूसरे को समझने और एक दूसरे को स्वीकार करने की कोशिश करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अराक विश्वविद्यालय, विश्व अहलेबैत (अ) परिषद और अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं के सहयोग से इमाम खुमैनी और इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर के विचारों में इस्लामी सम्प्रदाय के शीर्षक के अंतर्गत पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें महान विदेशी हस्तियों के अलावा बुज़ुर्ग सुन्नी उल्मा ने भी भाग लिया है।
22 दिसंबर 2016 - 16:31
समाचार कोड: 800066
इमाम खुमैनी ने बिना किसी भेदभाव और राष्ट्रवाद के इस्लाम, मुसलेमीन और इस्लामी एकता के लिए संघर्ष किया।